नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने देश की अगली जनगणना (Census 2027) को लेकर अपनी तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने संसद में स्पष्ट किया कि यह जनगणना आधुनिक तकनीक से लैस होगी और नागरिकों को पहली बार ‘Self-Enumeration’ (स्व-गणना) का विकल्प मिलेगा। कोविड-19 के कारण देरी से हो रही यह 16वीं जनगणना कई मायनों में ऐतिहासिक होने वाली है।
दो चरणों में पूरी होगी प्रक्रिया
सरकार ने पूरी जनगणना को दो मुख्य चरणों में विभाजित किया है:
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प्रथम चरण (अप्रैल से सितंबर 2026): इस चरण में ‘हॉउसलिस्टिंग’ (मकानों की सूची) और ‘आवास जनगणना’ का कार्य होगा। इसमें मकान की स्थिति, उपलब्ध सुविधाएं (बिजली, पानी, शौचालय) और संपत्तियों (वाहन, टीवी, इंटरनेट) से जुड़े 33 प्रश्न पूछे जाएंगे।
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विशेष नोट: उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में यह प्रक्रिया मई-जून 2026 के आसपास शुरू होने की संभावना है।
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द्वितीय चरण (फरवरी 2027): इसे ‘जनसंख्या गणना’ (Population Enumeration) कहा जाता है। इसमें प्रत्येक व्यक्ति की व्यक्तिगत जानकारी जैसे शिक्षा, धर्म, व्यवसाय, वैवाहिक स्थिति और जन्म स्थान का विवरण दर्ज किया जाएगा। 1 मार्च 2027 को इसकी ‘रेफरेंस डेट’ माना जाएगा।
डिजिटल जनगणना: मोबाइल ऐप और ऑनलाइन पोर्टल
इस बार की जनगणना में कागज और पेन का इस्तेमाल न्यूनतम होगा।
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मोबाइल ऐप: प्रगणक (Enumerators) डेटा इकट्ठा करने के लिए विशेष रूप से विकसित ‘एंड्रॉयड और iOS’ ऐप्स का उपयोग करेंगे।
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ऑनलाइन विकल्प: नागरिकों के पास यह विकल्प होगा कि वे जनगणना पोर्टल पर जाकर खुद अपनी जानकारी भर सकें। सेल्फ-एन्यूमरेशन करने के बाद उन्हें एक ‘रेफरेंस आईडी’ मिलेगी, जिसे बाद में घर आने वाले प्रगणक को दिखाना होगा।
पहली बार शामिल होंगे ये खास बिंदु
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जाति जनगणना (Caste Census): 1931 के बाद पहली बार इस जनगणना में व्यापक स्तर पर जातियों का डेटा भी इलेक्ट्रॉनिक रूप से दर्ज किया जाएगा।
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ट्रांसजेंडर हेड: परिवार के मुखिया के रूप में अब पुरुष और महिला के साथ-साथ ‘ट्रांसजेंडर’ का विकल्प भी शामिल किया गया है।
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तकनीकी गैजेट्स: डेटा में मोबाइल फोन, स्मार्टफोन और इंटरनेट की उपलब्धता जैसे नए सवाल भी जोड़े गए हैं।
डेटा की सुरक्षा और सटीकता
नित्यानंद राय ने सदन को आश्वस्त किया कि डिजिटल माध्यम से डेटा संग्रह करने से मानवीय गलतियां कम होंगी और डेटा प्रोसेसिंग में लगने वाला समय भी बचेगा। डेटा सुरक्षा के लिए सर्वर स्तर पर कड़े इंतजाम किए गए हैं और मोबाइल ऐप में ‘वैलिडेशन रूल्स’ लगाए गए हैं ताकि गलत जानकारी दर्ज न हो सके।
क्यों महत्वपूर्ण है यह जनगणना?
यह जनगणना न केवल भविष्य की सरकारी योजनाओं और बजट आवंटन का आधार बनेगी, बल्कि लोकसभा सीटों के परिसीमन (Delimitation)और महिला आरक्षण विधेयक के क्रियान्वयन के लिए भी यह डेटा अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगा।
