श्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में गहराते युद्ध और ईरान-इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ-साथ भारत की घरेलू व्यवस्थाओं को भी हिलाकर रख दिया है। जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के रास्ते होने वाली सप्लाई रुकने से भारत में प्राकृतिक गैस (LNG) की भारी किल्लत हो गई है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भारत सरकार ने ‘आवश्यक वस्तु अधिनियम’ (Essential Commodities Act) लागू कर गैस की सप्लाई को नियंत्रित करने का फैसला किया है।
प्राथमिकता के आधार पर होगी गैस की सप्लाई
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG) ने एक नया आदेश जारी किया है, जिसके तहत उपलब्ध गैस को चार श्रेणियों में बांटा गया है। इसका सीधा उद्देश्य आम जनता की बुनियादी जरूरतों को बचाए रखना है:
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पहली प्राथमिकता: घरेलू पाइप नेचुरल गैस (PNG), वाहनों के लिए CNG और LPG उत्पादन को 100% सप्लाई दी जाएगी।
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दूसरी प्राथमिकता: उर्वरक (Fertilizer) क्षेत्र को उनके पिछले छह महीने के औसत उपभोग का 70% हिस्सा मिलेगा।
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अन्य क्षेत्र: चाय उद्योग और अन्य औद्योगिक निकायों को 80% तक सीमित किया गया है, जबकि रिफाइनरियों की सप्लाई में 65% की कटौती की गई है।
उद्योगों पर ‘रिपल इफेक्ट’: स्टील से लेकर टेक्सटाइल तक संकट
युद्ध के कारण केवल ईंधन ही महंगा नहीं हुआ है, बल्कि कच्चे माल की सप्लाई चेन भी टूट गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसके ‘तिहरे प्रभाव’ (Triple Effect) देखने को मिल रहे हैं:
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कच्चा माल: पेट्रोकेमिकल्स के लिए जरूरी ‘नैफ्था फीडस्टॉक’ की कमी से प्लास्टिक और रेजिन की कीमतें 35% से 60% तक बढ़ गई हैं।
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लागत में वृद्धि: स्टील बनाने में इस्तेमाल होने वाले कोकिंग कोल की सप्लाई बाधित होने से लोहा और स्टील महंगा हो गया है।
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टेक्सटाइल और पैकेजिंग: पॉलिएस्टर और फाइबर की कीमतों में भारी उछाल आया है। गुजरात जैसे बड़े मैन्युफैक्चरिंग हब में इनपुट कॉस्ट 50% तक बढ़ गई है, जिससे कपड़े और पैकेजिंग मटीरियल के दाम बढ़ना तय है।
भू-राजनीतिक हलचल: ट्रंप और ईरान का रुख
एक ओर जहां युद्ध की विभीषणता बढ़ रही है, वहीं अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भी तेजी से बदलाव आ रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि वे इस युद्ध को जल्द समाप्त करा सकते हैं। हालांकि, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका या इजरायल ने उन पर हमला किया, तो वे होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाली तेल की सप्लाई को पूरी तरह ठप कर देंगे।
भारत अपनी जरूरत की 50% LNG कतर और UAE जैसे देशों से इसी रास्ते के जरिए मंगवाता है। यदि यह रास्ता बंद रहता है, तो भारत के लिए आने वाले दिन और चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।
पश्चिम एशिया का यह संकट भारत के लिए एक बड़ी आर्थिक परीक्षा है। जहां सरकार घरेलू उपभोक्ताओं को बचाने की कोशिश कर रही है, वहीं औद्योगिक क्षेत्र पर बढ़ती महंगाई का बोझ आम आदमी की जेब पर असर डाल सकता है।
