लखनऊ: उत्तर प्रदेश की चिकित्सा सुविधाओं में एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ने जा रहा है। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) प्रदेश का पहला ‘बोन एंड टिश्यू बैंक’ (Bone and Tissue Bank) स्थापित करने के लिए पूरी तरह तैयार है। उम्मीद जताई जा रही है कि अगले एक से दो महीने के भीतर यह बैंक पूरी तरह क्रियाशील हो जाएगा।
अंतिम चरण में है तैयारी
KGMU के सूत्रों के अनुसार, इस सुविधा के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा (Infrastructure) तैयार कर लिया गया है और सभी जरूरी उपकरण भी स्थापित किए जा चुके हैं। वर्तमान में विश्वविद्यालय को ‘महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा’ (DGME) से अंतिम मंजूरी का इंतज़ार है, जिसके मिलते ही इस सेवा को औपचारिक रूप से शुरू कर दिया जाएगा।
मरीजों के लिए क्यों है यह ‘संजीवनी’?
KGMU के ऑर्थोपेडिक सर्जरी विभाग के डॉ. आशीष कुमार ने बताया कि कई जटिल सर्जरी में हड्डियों का ग्राफ्टिंग (Bone Grafting) एक अनिवार्य हिस्सा होता है। यह बैंक निम्नलिखित स्थितियों में मरीजों के लिए अत्यंत मददगार साबित होगा:
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हड्डियों की भारी कमी: दुर्घटनाओं, ट्यूमर, संक्रमण या रिवीजन जॉइंट रिप्लेसमेंट के मामलों में जब मरीज की अपनी हड्डी पर्याप्त नहीं होती, तब डोनर हड्डी की आवश्यकता पड़ती है।
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रिवीजन सर्जरी: वर्तमान में रिवीजन जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी के मामले बढ़ रहे हैं, जहाँ सर्जन को इम्प्लांट के आसपास हड्डियों के भारी नुकसान का सामना करना पड़ता है। ऐसे में डोनर बोन ग्राफ्ट के बिना सर्जरी संभव नहीं हो पाती।
कैसे काम करेगा यह बैंक?
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डोनर बोन का संरक्षण: बैंक मुख्य रूप से हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी के दौरान निकाले गए ‘फेमोरल हेड’ जैसे डोनर बोन घटकों को संरक्षित करेगा।
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सुरक्षा के कड़े मानक: डोनर की हड्डियों को –80°C पर स्टोर किया जाएगा। संक्रमण या एंटीजेनिकिटी के जोखिम को खत्म करने के लिए डोनर की बार-बार स्क्रीनिंग की जाएगी।
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विभिन्न स्वरूप: संरक्षित हड्डी को सर्जरी की जरूरत के अनुसार बोन चिप्स, पाउडर या पूरे स्ट्रक्चरल ग्राफ्ट के रूप में प्रोसेस और स्टोर किया जा सकता है।
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त्वरित प्रक्रिया: डॉक्टरों के अनुसार, स्टरलाइजेशन (कीटाणुशोधन) की प्रक्रिया 24 घंटों के भीतर पूरी की जा सकती है, जिससे ऊतक सुरक्षित और उपयोग के लिए तैयार हो जाते हैं।
देश के गिने-चुने संस्थानों में होगा शामिल
वर्तमान में भारत के केवल कुछ ही प्रमुख संस्थानों जैसे AIIMS (नई दिल्ली), टाटा मेमोरियल अस्पताल (मुंबई) और रमैया मेडिकल कॉलेज (चेन्नई) में ही बोन बैंक संचालित हैं। KGMU में इस सुविधा के शुरू होने से उत्तर प्रदेश भी उन चुनिंदा राज्यों की सूची में शामिल हो जाएगा जहाँ यह उन्नत बुनियादी ढांचा उपलब्ध है।
