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    Home»दुनिया»ईरान में सत्ता का ‘पुल’ टूटा और सुलग उठा पश्चिम एशिया
    ईरान में सत्ता का ‘पुल’ टूटा और सुलग उठा पश्चिम एशिया

    ईरान में सत्ता का ‘पुल’ टूटा और सुलग उठा पश्चिम एशिया

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    By News Drift on March 3, 2026 दुनिया
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    पश्चिम एशिया (West Asia) एक बार फिर बारूद के ढेर पर है। ईरान के सर्वोच्च नेता आयतोलला अली खामेनेई की हत्या के बाद पूरे क्षेत्र में संघर्ष का एक नया और खतरनाक अध्याय शुरू हो गया है। जहाँ एक ओर ईरान अपने ‘पावर पिरामिड’ को बचाने के लिए संघर्ष कर रहा है, वहीं दूसरी ओर इज़राइल और अमेरिका के साथ उसका सीधा टकराव ‘पूर्ण युद्ध’ की आहट दे रहा है।

     

    1. ईरान का पावर पिरामिड: सर्वोच्च नेता के बिना क्या होगा?

    ईरान की राजनीतिक व्यवस्था दुनिया की सबसे अनोखी प्रणालियों में से एक है, जहाँ लोकतंत्र और धर्मतंत्र (Theocracy) का मिश्रण है।

    • सर्वोच्च नेता (Supreme Leader): यह ईरान का सबसे शक्तिशाली पद है। आयतोलला अली खामेनेई 1989 से इस पद पर थे। वे सेना के कमांडर-इन-चीफ होने के साथ-साथ न्यायपालिका और मीडिया पर भी नियंत्रण रखते थे। उनकी मृत्यु ने एक बड़ा ‘शक्ति शून्य’ (Power Vacuum) पैदा कर दिया है।

    • अभिभावक परिषद (Guardian Council): 12 सदस्यीय यह संस्था तय करती है कि कौन चुनाव लड़ सकता है और कौन नहीं। यह सीधे सर्वोच्च नेता के प्रति जवाबदेह होती है।

    • ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC): यह ईरान की सबसे शक्तिशाली सैन्य इकाई है, जो देश की सीमाओं से बाहर (जैसे सीरिया, लेबनान और इराक में) ईरान के प्रभाव को फैलाती है।

    2. संघर्ष का नया थिएटर: कहाँ-कहाँ हो रहे हैं हमले?

    अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, ‘स्ट्राइक और काउंटर-स्ट्राइक’ का सिलसिला अब केवल ईरान और इज़राइल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें कई अन्य देश और रणनीतिक ठिकाने भी शामिल हो गए हैं:

    क्षेत्र/ठिकाना महत्व और वर्तमान स्थिति
    होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग। ईरान ने यहाँ से गुजरने वाले टैंकरों पर हमले तेज किए हैं।
    सऊदी अरब (अरामको) ईरान समर्थित गुटों ने सऊदी की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी ‘रास तनुरा’ को निशाना बनाया है।
    UAE (दुबई और अबू धाबी) पाम जुमेराह और बुर्ज अल अरब जैसे पर्यटन केंद्रों के पास ड्रोन हमले और विस्फोट दर्ज किए गए हैं।
    कुवैत और कतर यहाँ अमेरिकी सैन्य ठिकाने और दुनिया की सबसे बड़ी LNG सुविधाएं (रास लफान) खतरे में हैं।

    3. ‘मैत्रीपूर्ण आग’ (Friendly Fire) और तकनीकी युद्ध

    ताजा संघर्ष में एक चौंकाने वाली घटना कुवैत में हुई, जहाँ कुवैती वायु रक्षा प्रणाली ने गलती से तीन अमेरिकी लड़ाकू विमानों को मार गिराया। इसे ‘फ्रेंडली फायर’ की श्रेणी में रखा गया है, जो युद्ध के मैदान में बढ़ते तनाव और भ्रम (Confusion) को दर्शाता है।

    इतना ही नहीं, ईरान ने जवाबी कार्रवाई में बहरीन, कतर और ओमान में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलों की बारिश कर दी है।

    4. भविष्य की राह: क्या युद्ध थमेगा?

    ईरान के नए राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन पर इस समय भारी दबाव है। एक ओर उन्हें देश के भीतर खामेनेई के उत्तराधिकारी को लेकर चल रही खींचतान को संभालना है, तो दूसरी ओर बाहरी मोर्चे पर इज़राइल के साथ सीधे युद्ध से बचना है।

    • तुर्की की भूमिका: जानकारों का मानना है कि अगर तुर्की के किसी सैन्य अड्डे पर हमला होता है, तो NATO सीधे इस युद्ध में कूद सकता है, जो इसे तीसरे विश्व युद्ध की ओर ले जा सकता है।

    • तेल की कीमतें: यदि खाड़ी देशों की रिफाइनरियों पर हमले जारी रहे, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं, जिससे भारत समेत पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी।

    आयतोलला खामेनेई का युग समाप्त होना केवल ईरान के लिए नहीं, बल्कि पूरे विश्व की भू-राजनीति के लिए एक निर्णायक मोड़ है। पश्चिम एशिया अब उस मोड़ पर है जहाँ एक छोटी सी गलती पूरी दुनिया को भारी संकट में डाल सकती है।

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