नई दिल्ली: भारत ने अपनी औपनिवेशिक विरासत को पीछे छोड़ते हुए आधुनिक शासन की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बढ़ाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार, 13 फरवरी को नवनिर्मित ‘सेवा तीर्थ’ परिसर का उद्घाटन किया। अब देश का प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय और केंद्रीय सचिवालय इसी आधुनिक परिसर से संचालित होंगे।
ऐतिहासिक बदलाव: ‘साउथ ब्लॉक’ से ‘सेवा तीर्थ’ तक
प्रधानमंत्री कार्यालय अब रायसीना हिल पर स्थित ब्रिटिश काल की ऐतिहासिक ‘साउथ ब्लॉक’ इमारत से ‘सेवा तीर्थ’ परिसर में स्थानांतरित हो गया है।
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प्रतीकात्मक महत्व: यह बदलाव 13 फरवरी को हुआ, जो 1931 में नई दिल्ली को औपचारिक रूप से राजधानी बनाए जाने के 95 वर्ष पूरे होने का अवसर भी है।
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नामकरण: पीएमओ के नए भवन का नाम ‘सेवा तीर्थ’ रखा गया है, जबकि केंद्रीय सचिवालय की दो नई इमारतों को ‘कर्तव्य भवन 1 और 2’ के रूप में जाना जाएगा।
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स्मारक उपहार: इस अवसर पर पीएम मोदी ने एक स्मारक डाक टिकट और एक सिक्का भी जारी किया, जिस पर ‘सेवा तीर्थ’ का नाम अंकित है।
“पुरानी इमारतें गुलामी की प्रतीक थीं”
संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह केवल ईंट और पत्थर का बदलाव नहीं, बल्कि मानसिकता का परिवर्तन है। उन्होंने कहा कि पुरानी इमारतें गुलामी की मानसिकता में जकड़ी हुई थीं, जबकि नए भवन नागरिक-केंद्रित शासन और राष्ट्रीय प्रगति के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।
“जैसे-जैसे देश विकसित भारत की ओर बढ़ रहा है, यह महत्वपूर्ण है कि भारत औपनिवेशिक मानसिकता के हर निशानी को छोड़ दे।” – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
विकास और सुरक्षा के लिए नई घोषणाएं
परिसर के उद्घाटन के साथ ही प्रधानमंत्री ने कई महत्वपूर्ण जनकल्याणकारी योजनाओं और लक्ष्यों की भी चर्चा की:
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पीएम राहत योजना: दुर्घटना पीड़ितों के लिए ₹1.5 लाख तक के कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी।
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लखपति दीदी: मार्च 2029 तक लखपति दीदियों की संख्या का लक्ष्य बढ़ाकर 6 करोड़ कर दिया गया है।
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कृषि और स्टार्टअप: कृषि अवसंरचना निधि को दोगुना कर ₹2 लाख करोड़ किया गया और ₹10,000 करोड़ की निधि के साथ ‘स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0’ को मंजूरी दी गई।
पुराने भवनों का क्या होगा?
साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक जैसी ऐतिहासिक इमारतें, जो ब्रिटिश साम्राज्य के आदर्शों को मूर्त रूप देने के लिए बनाई गई थीं, अब इतिहास का हिस्सा बनेंगी। प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि इन भवनों को अब देश के लिए समर्पित म्यूजियम (संग्रहालय) बनाया जाएगा, ताकि आने वाली पीढ़ियां भारत के विकास के सफर को समझ सकें।
