“पद्म सम्मान 2026: गुमनाम नायकों की पहचान और प्रतिभा का राजकीय अभिनंदन
भारत रत्न के बाद देश के दूसरे सबसे प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान ‘पद्म पुरस्कारों’ की घोषणा हर साल गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर की जाती है। यह केवल एक पदक या प्रमाण पत्र नहीं है, ये पुरस्कार कला, साहित्य और शिक्षा, खेल, चिकित्सा, समाज कार्य, विज्ञान और इंजीनियरिंग, सार्वजनिक मामले, सिविल सेवा, व्यापार और उद्योग आदि सहित विभिन्न क्षेत्रों में विशिष्ट और असाधारण सेवा के लिए व्यक्तियों को सम्मानित करना है। 1954 में अपनी स्थापना से लेकर 2026 तक, इन पुरस्कारों ने कई बदलाव देखे हैं, विशेषकर ‘अभिजात्य वर्ग के सम्मान’ से ‘जनता के सम्मान’ बनने तक का सफर।
ये पुरस्कार भारत के राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोहों में प्रदान किए जाते हैं, जो आमतौर पर प्रत्येक वर्ष मार्च/अप्रैल के आसपास होते हैं। वर्ष 2026 के लिए, राष्ट्रपति ने 131 पद्म पुरस्कारों के प्रदान करने की स्वीकृति दी है, जिनमें 2 युगल पुरस्कार (युगल पुरस्कार को एक ही माना जाता है) शामिल हैं । इस सूची में 5 पद्म विभूषण, 13 पद्म भूषण और 113 पद्म श्री पुरस्कार शामिल हैं। पुरस्कार प्राप्त करने वालों में 19 महिलाएं हैं और सूची में विदेशी/एनआरआई/पीआईओ/ओसीआई श्रेणी के 6 व्यक्ति और 16 मरणोपरांत पुरस्कार प्राप्तकर्ता भी शामिल हैं।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: कैसे हुई शुरुआत?
भारत सरकार ने 1954 में दो नागरिक पुरस्कारों की स्थापना की थी, भारत रत्न और तीन-वर्गीय ‘पद्म विभूषण’ (पहला वर्ग, दूसरा वर्ग और तीसरा वर्ग)।
नामों में बदलाव: 8 जनवरी, 1955 को एक राष्ट्रपति अधिसूचना के जरिए इनके नाम बदलकर पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री कर दिए गए।
निलंबन का दौर: ये पुरस्कार हमेशा निर्बाध नहीं रहे। 1977 में मोरारजी देसाई की सरकार ने इन्हें बंद कर दिया था, जिन्हें 1980 में इंदिरा गांधी सरकार ने दोबारा शुरू किया। इसके बाद 1992 से 1995 के बीच कुछ कानूनी विवादों के कारण भी इनकी घोषणा नहीं हुई थी।
पुरस्कारों की श्रेणियां और गरिमा
श्रेणी महत्व पात्रता
पद्म विभूषण. दूसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान असाधारण और विशिष्ट सेवा के लिए।
पद्म भूषण तीसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान उच्च कोटि की विशिष्ट सेवा के लिए।
पद्म श्री चौथा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान किसी भी क्षेत्र में विशिष्ट सेवा के लिए
कुछ महत्वपूर्ण नियम और शर्तें
पदक, उपाधि नहीं: सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार, इन पुरस्कारों का उपयोग ‘उपाधि’ के रूप में नाम के आगे या पीछे नहीं किया जा सकता (जैसे ‘पद्म श्री फलाने सिंह’ लिखना गलत है)।
विजेताओं की संख्या: एक वर्ष में दिए जाने वाले पुरस्कारों की कुल संख्या (मरणोपरांत और विदेशियों को छोड़कर) 120 से अधिक नहीं होनी चाहिए।
कोई नकद राशि नहीं: इन पुरस्कारों के साथ कोई नकद राशि नहीं दी जाती, बल्कि राष्ट्रपति के हस्ताक्षर वाला एक प्रमाण पत्र और एक पदक दिया जाता है।
पहनने का तरीका: इन पदकों को गले में नहीं पहना जाता, बल्कि इन्हें बाएं सीने (Left Breast) पर एक रिबन की मदद से लगाया जाता है।
2026 में कुल 131 पद्म पुरस्कार:
पद्म विभूषण (5)
1- स्वर्गीय धर्मेंद्र सिंह देओल (मरणोपरांत)- कला – महाराष्ट्र
2-श्री के टी थॉमस- सार्वजनिक मामले- केरल
3-सुश्री एन राजम-कला, वाराणसी उत्तर प्रदेश
4- श्री पी नारायणन-साहित्य एवं शिक्षा- केरल
5- स्वर्गीय वी एस अच्युतानंदन (मरणोपरांत)- सार्वजनिक मामले- केरल
पद्म भूषण (13)
| क्र सं | पद्म भूषण विजेता | श्रेणी | स्थान |
| 1 | सुश्री अलका याग्निक | कला | महाराष्ट्र |
| 2 | श्री भगत सिंह कोश्यारी | सार्वजनिक मामले | उत्तराखंड |
| 3 | श्री कल्लीपट्टी रामासामी पलानीस्वामी | चिकित्सा | तमिलनाडु |
| 4 | श्री ममूटी | कला | केरल |
| 5 | डॉ. नोरी दत्तात्रेयुडु | चिकित्सा | संयुक्त राज्य अमेरिका |
| 6 | श्री पीयूष पांडे (मरणोपरांत) | कला | महाराष्ट्र |
| 7 | श्री एस के एम मैइलानंदन | सामाजिक कार्य | तमिलनाडु |
| 8 | श्री शतावधानी आर गणेश | कला | कर्नाटक |
| 9 | श्री शिबू सोरेन (मरणोपरांत) | सार्वजनिक मामले | झारखंड |
| 10 | श्री उदय कोटक | व्यापार और उद्योग | महाराष्ट्र |
| 11 | श्री वी. के. मल्होत्रा (मरणोपरांत) | सार्वजनिक मामले | दिल्ली |
| 12 | श्री वेल्लापल्ली नटेसन | सार्वजनिक मामले | केरल |
| 13 | श्री विजय अमृतराज | खेल | संयुक्त राज्य अमेरिका |
कुल 113 पद्म श्री दिए गए जिनमे 10 विजेता उत्तर प्रदेश से रहे–
| क्र सं | उत्तर प्रदेश के पद्म श्री विजेता | श्रेणी | स्थान |
| 1 | श्री अनिल कुमार रस्तोगी | कला | लखनऊ, उत्तर प्रदेश |
| 2 | श्री अशोक कुमार सिंह | विज्ञान और प्रौद्योगिकी | गाजीपुर, उत्तर प्रदेश |
| 3 | श्री बुद्ध रश्मी मणि | पुरातत्व | बागपत ,उत्तर प्रदेश |
| 4 | श्री चिरंजी लाल यादव | कला | मुरादाबाद ,उत्तर प्रदेश |
| 5 | श्री केवल कृष्ण ठकराल | चिकित्सा | लखनऊ,उत्तर प्रदेश |
| 6 | सुश्री मंगला कपूर | साहित्य और शिक्षा | वाराणसी ,उत्तर प्रदेश |
| 7 | श्री प्रवीण कुमार-खेल | खेल | नोएडा , उत्तर प्रदेश |
| 8 | श्री रघुपत सिंह (मरणोपरांत) | कृषि | मुरादाबाद ,उत्तर प्रदेश |
| 9 | श्री राजेंद्र प्रसाद | चिकित्सा | बस्ती , उत्तर प्रदेश |
| 10 | श्री श्याम सुन्दर | चिकित्सा | वाराणसी, उत्तर प्रदेश |
| नोट – 2026 में उत्तर प्रदेश से 1 पद्म विभूषण (सुश्री एन राजम-कला) और 10 पद्म श्री विजेता रहे। |
विदेशी पद्म पुरस्कार विजेता:
| क्र सं | विदेशी पद्म विजेता | श्रेणी | श्रेणी | स्थान |
| 1 | डॉ. नोरी त्तात्रेयुडु | पद्म भूषण | चिकित्सा | संयुक्त राज्य अमेरिका |
| 2 | श्री विजय अमृतराज- | पद्म भूषण | खेल | संयुक्त राज्य अमेरिका |
| 3 | प्रो. (डॉ.) लार्स-क्रिश्चियन कोच | पद्म श्री | कला | जर्मनी |
| 4 | सुश्री ल्यूडमिला विक्टोरोवना खोखलोवा | पद्म श्री | साहित्य और शिक्षा | रूस |
| 5 | श्री प्रतीक शर्मा | पद्म श्री | चिकित्सा | संयुक्त राज्य अमेरिका |
| 6 | श्री व्लादिमीर मेस्टविरिश्विली (मरणोपरांत) | पद्म श्री | खेल | जॉर्जिया |
गुमनाम नायकों की जीत:
इस बार की सूची में उन चेहरों को प्रमुखता मिली है जो दशकों से समाज के अंतिम छोर पर बदलाव ला रहे हैं। सरकार ने 45 ऐसे व्यक्तियों को चुना है जिन्हें ‘गुमनाम नायक’ की श्रेणी में रखा गया है:
अंके गौड़ा (कर्नाटक): कभी बस कंडक्टर रहे अंके गौड़ा ने 20 लाख से अधिक पुस्तकों का ‘पुस्तका माने’ नाम से दुनिया का सबसे बड़ा फ्री-एक्सेस पुस्तकालय खड़ा कर दिया।
हल्ली वार (मेघालय): पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में असाधारण कार्य करने वाले योद्धा।
तगा राम भील (राजस्थान): राजस्थान के पारंपरिक वाद्य यंत्र ‘अल्गोजा’ को पुनर्जीवित करने वाले कलाकार।
डॉ. अरमिडा फर्नांडीज (महाराष्ट्र): एशिया का पहला ‘ह्यूमन मिल्क बैंक’ स्थापित करने वाली चिकित्सक।
खेल और कला का संगम
भारतीय क्रिकेट के ‘हिटमैन’ रोहित शर्मा और महिला टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर को पद्म श्री से नवाजा जाना खेलों के प्रति देश के बढ़ते गौरव को दर्शाता है। वहीं, सिनेमा जगत के ‘ही-मैन’ धर्मेंद्र और दिग्गज अभिनेता ममूटी का सम्मान उनकी दशकों लंबी कला यात्रा का राजकीय अभिनंदन है।
2014 के बाद का ‘पैराडाइम शिफ्ट’: पीपुल्स पद्म
पिछले एक दशक में पद्म पुरस्कारों के चयन की प्रक्रिया में क्रांतिकारी बदलाव आया है। पहले जहाँ ये पुरस्कार अक्सर सिफारिशों और राजनीतिक रसूख पर आधारित माने जाते थे, वहीं अब ‘Common Man’ (आम आदमी) को केंद्र में रखा गया है।
ऑनलाइन नामांकन: अब कोई भी नागरिक किसी भी योग्य व्यक्ति को ऑनलाइन नामांकित कर सकता है।
गुमनाम नायकों की खोज: 2026 की सूची में शामिल 45 ‘Unsung Heroes’ इसी बदलाव का नतीजा हैं। यह अब “सिफारिशी तंत्र” से निकलकर “खोज तंत्र” बन चुका है।
पिछले कुछ वर्षों में पद्म पुरस्कारों की चयन प्रक्रिया में बड़ा बदलाव आया है। अब यह सम्मान केवल लुटियंस दिल्ली के गलियारों तक सीमित नहीं है, बल्कि सुदूर गांवों, आदिवासी क्षेत्रों और हाशिए पर खड़े उन लोगों तक पहुँच रहा है जिनकी साधना अब तक दुनिया की नज़रों से ओझल थी। यह सही मायने में “प्रतिभा का राजकीय अभिनंदन” है।
