उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘लॉन्चपैड’ विजन को पंख लग गए हैं। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Jewar Airport) के पहले चरण के औपचारिक उद्घाटन के साथ ही जेवर ने न केवल विश्व मानचित्र पर अपनी जगह बनाई है, बल्कि दिल्ली-एनसीआर के रियल एस्टेट बाजार के समीकरणों को पूरी तरह बदल कर रख दिया है।
संपत्ति की कीमतों में रिकॉर्ड तोड़ वृद्धि
एक समय गुमनाम रहा जेवर आज निवेशकों की पहली पसंद बन चुका है। स्थानीय डीलरों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में ज़मीन की कीमतों में जो वृद्धि देखी गई है, वह अभूतपूर्व है।
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7 सालों में भारी उछाल: एयरपोर्ट के करीब स्थित ‘टप्पल’ जैसे इलाकों में जमीन की कीमतें जो कभी कुछ लाख प्रति हेक्टेयर थीं, अब 26 लाख प्रति हेक्टेयर के पार पहुँच गई हैं।
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इन्क्वायरी का अंबार: साल 2019 के बाद से ही पूछताछ का सिलसिला शुरू हो गया था, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी द्वारा आधारशिला रखे जाने के बाद 2021 से इसमें भारी तेजी आई। अब निवेशक दिल्ली के विकल्प के तौर पर नहीं, बल्कि एक ‘ग्लोबल हब’ के तौर पर जेवर को देख रहे हैं।
लॉजिस्टिक और व्यापार का नया केंद्र
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उद्घाटन समारोह में जोर देते हुए कहा कि यह एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश के आर्थिक विकास के लिए एक ‘लॉन्चपैड’ साबित होगा। यह न केवल यात्री परिवहन बल्कि एक बड़े कार्गो हब के रूप में भी कार्य करेगा, जिससे व्यापार, निवेश और रोजगार के लाखों अवसर पैदा होंगे। जेवर अब नोएडा से सिर्फ एक सड़क मार्ग से नहीं, बल्कि अपनी एक स्वतंत्र वैश्विक पहचान से जुड़ा है।
राजनीतिक श्रेय की होड़: मायावती का दावा
एयरपोर्ट के उद्घाटन के साथ ही राज्य में राजनीतिक सरगर्मियां भी तेज हो गई हैं। बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती ने ट्वीट और प्रेस वक्तव्य के जरिए इस प्रोजेक्ट का श्रेय अपनी सरकार को दिया है।
“जेवर एयरपोर्ट की सिर्फ परिकल्पना ही नहीं, बल्कि इसकी बुनियादी रूपरेखा और जमीन तैयार करने का काम बसपा सरकार के दौरान ही शुरू हो गया था। यदि उस समय केंद्र की कांग्रेस सरकार ने अड़ंगे न लगाए होते, तो यह प्रोजेक्ट यमुना एक्सप्रेसवे की तरह बहुत पहले ही पूरा हो गया होता।” — मायावती, प्रमुख बसपा
अवैध निर्माण पर प्रशासन की पैनी नज़र
तेजी से बढ़ते निवेश के बीच यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) ने सख्त रुख अपनाया है। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि अनधिकृत कॉलोनियों और अवैध निर्माणों के खिलाफ ध्वस्तीकरण की कार्रवाई जारी रहेगी। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे केवल फ्रीहोल्ड लैंड और प्राधिकरण से मंजूर प्रोजेक्ट्स में ही निवेश करें।
निष्कर्ष
जेवर एयरपोर्ट केवल एक बुनियादी ढांचा (Infrastructure) नहीं है, बल्कि यह बदलते उत्तर प्रदेश की तस्वीर है। जहाँ एक ओर राजनीति में इसके श्रेय को लेकर खींचतान है, वहीं दूसरी ओर आम जनता और निवेशकों के लिए यह समृद्धि का नया द्वार खोल रहा है।
