अयोध्या और वाराणसी के बाद अब उत्तर प्रदेश सरकार संभल को एक बड़े धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की तैयारी कर रही है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार संभल को भगवान विष्णु के भविष्य के अवतार ‘कल्कि’ की जन्मस्थली माना जाता है। इसी आस्था को केंद्र में रखते हुए सरकार ने संभल को धार्मिक मानचित्र पर स्थापित करने के लिए एक विस्तृत खाका तैयार किया है।
300 करोड़ की लागत से ‘परिक्रमा मार्ग’ का कायाकल्प
इस योजना का सबसे मुख्य आकर्षण 52 किलोमीटर लंबा परिक्रमा मार्ग है, जिसे ₹300 करोड़ की लागत से पुनर्विकसित किया जाएगा।
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क्या है खास? इस मार्ग पर बेहतर सड़कें बनाई जाएंगी और पैदल चलने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक अलग 3-मीटर ऊंचा फुटपाथ तैयार किया जाएगा।
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विरासत का संरक्षण: योजना के तहत 68 तीर्थ स्थलों, 19 प्राचीन कुओं (मकापा) और 24 कोसी परिक्रमा यात्रा से जुड़े ‘वंशगोपाल’ जैसे स्थलों को पुनर्जीवित किया जाएगा।
तीन चरणों में होगा विकास
संभल के जिलाधिकारी राजेंदर पेंसिया के अनुसार, लगभग 50 वर्षों (1972 के बाद) से उपेक्षित पड़े इस मार्ग को अब तीन चरणों में विकसित किया जा रहा है:
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प्रथम चरण: मंदिरों, घाटों और कुंडों का आध्यात्मिक जीर्णोद्धार।
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द्वितीय चरण: सड़क, बुनियादी ढांचा, स्वच्छता और पार्किंग जैसी सुविधाओं का निर्माण।
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तृतीय चरण: भगवान कल्कि की महिमा को दर्शाने के लिए एक ‘कल्कि संग्रहालय’ का निर्माण और शहर को ब्रांडिंग के जरिए वैश्विक पहचान दिलाना।
मथुरा-वृंदावन सर्किट से जुड़ाव
सरकार का व्यापक लक्ष्य संभल को एक स्वतंत्र आध्यात्मिक गंतव्य के रूप में स्थापित करना और इसे मथुरा, वृंदावन और नैमिषारण्य जैसे स्थापित धार्मिक सर्किटों से जोड़ना है। इसके लिए 58 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण और नागरिक सुविधाओं के विकास के लिए अतिरिक्त बजट को भी मंजूरी दी गई है।
महत्वपूर्ण तथ्य: संभल का यह परिक्रमा मार्ग प्रतिवर्ष 6 से 7 लाख श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। इस विकास परियोजना से न केवल पर्यटन बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी।
