धर्म और आस्था की नगरी काशी में मां गंगा के बीचों-बीच नाव पर ‘इफ्तार पार्टी’ आयोजित करने का मामला गंभीर होता जा रहा है। इस मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अब तक 14 लोगों को गिरफ्तार किया है। वहीं, विवादों में आए मोटरबोट के मालिक काशी साहनी ने पुलिस पूछताछ में अपनी बेगुनाही का दावा किया है।
क्या है पूरा विवाद?
यह घटना रविवार, 15 मार्च की है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसमें कुछ लोग गंगा नदी के बीच एक चलती नाव पर इफ्तार करते नजर आ रहे थे। आरोप है कि इस दौरान नाव पर चिकन बिरयानी का सेवन किया गया और बचे हुए खाने व कूड़े को सीधे पवित्र गंगा नदी में प्रवाहित कर दिया गया।
वीडियो सामने आने के बाद भारतीय जनता युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष रजत जायसवाल ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने मंगलवार को 14 आरोपियों को हिरासत में लिया।
इन गंभीर धाराओं में दर्ज हुआ केस
गिरफ्तार किए गए आरोपियों पर धार्मिक भावनाओं को भड़काने और पर्यावरण नियमों के उल्लंघन से जुड़ी कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है:
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धार्मिक अपमान: पूजा स्थल (गंगा) को अपवित्र करना।
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सामाजिक वैमनस्य: विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देना।
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प्रदूषण: जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम का उल्लंघन।
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सार्वजनिक उपद्रव: सार्वजनिक स्थान पर अशांति फैलाना।
नाव मालिक का बयान: “मैं केवल बिजनेस कर रहा था”
पुलिस ने नाव के मालिक, 65 वर्षीय काशी साहनी की पहचान कर उनसे पूछताछ की। शिवाला इलाके के रहने वाले साहनी ने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ से बात करते हुए बताया:
“15 मार्च की शाम नाजू यादव नाम के एक व्यक्ति ने 30 लोगों की क्षमता वाली मेरी नाव को 1,800 रुपये में बुक किया था। मुझे लगा कि वे केवल सैर के लिए जा रहे हैं। जब यह घटना हुई, तब मैं नाव पर नहीं था। मुझे विवाद के बारे में तब पता चला जब दो दिन बाद पुलिस मेरे घर आई।”
साहनी की बेटी नैना ने भी बताया कि उस शाम घाट पर काफी भीड़ थी और भंडारा चल रहा था, इसलिए उन्होंने इस बात पर ध्यान नहीं दिया कि यात्री नाव पर क्या सामान ले जा रहे हैं।
पुलिस की अगली कार्रवाई
वाराणसी के सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) विजय प्रताप सिंह के अनुसार, इस मामले में अभी नाजू यादव और 2-3 अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है। पुलिस यह भी जांच रही है कि क्या नाव चलाने वाले या साहनी के परिवार के किसी सदस्य की इस पूरे घटनाक्रम में कोई सीधी भूमिका थी।
वाराणसी के नाविकों के संगठन ‘मां गंगा निषाद राज सेवा न्यास’ ने नाव मालिक का समर्थन करते हुए कहा है कि किसी यात्री की निजी गतिविधियों के लिए नाव मालिक को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है।
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