देश की जनता पर महंगाई की एक और मार पड़ी है। शनिवार, 7 मार्च 2026 से घरेलू और कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की कीमतों में भारी बढ़ोतरी कर दी गई है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब ईरान जंग के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा संकट गहराता जा रहा है। सरकार ने इस संकट के बीच सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए रिफाइनर्स को भी आपातकालीन निर्देश जारी किए हैं।
घरेलू और कमर्शियल सिलेंडर के नए दाम
आज से लागू हुई नई दरों के अनुसार, रसोई गैस की कीमतों में सीधा उछाल आया है:
-
घरेलू सिलेंडर (14.2 किग्रा): इसकी कीमत में 60 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में अब घरेलू सिलेंडर की कीमत बढ़कर 950.50 रुपये हो गई है।
-
कमर्शियल सिलेंडर (19 किग्रा): व्यावसायिक सिलेंडर के रेट में लगभग 115 रुपये का इजाफा हुआ है। इसका सीधा असर होटल, रेस्टोरेंट और छोटे व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर पड़ेगा, जिससे बाहर खाना भी महंगा हो सकता है।
यह नई दरें आज से ही पूरे भारत में प्रभावी रूप से लागू हो गई हैं।
ईरान जंग का असर और सप्लाई का संकट
कीमतों में इस अचानक बढ़ोतरी का मुख्य कारण ईरान और वेस्ट एशिया में छिड़ी जंग को माना जा रहा है। भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा एलपीजी ‘स्ट्रैट ऑफ होर्मुज’ के रास्ते आयात करता है। युद्ध के कारण इस समुद्री रास्ते पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है, जिससे वैश्विक स्तर पर गैस की कीमतों में तेजी आई है।
सकार के कड़े निर्देश: ‘सिर्फ रसोई गैस बनाओ’
बढ़ती कीमतों और सप्लाई में संभावित रुकावट को देखते हुए, भारत सरकार ने ‘Essential Commodities Act’ के तहत सख्त आदेश जारी किए हैं:
-
एलपीजी उत्पादन: सभी तेल रिफाइनिंग कंपनियों को निर्देश दिया गया है कि वे प्रोपेन और ब्यूटेन का इस्तेमाल केवल एलपीजी बनाने के लिए करें।
-
पेट्रोकेमिकल्स पर रोक: रिफाइनर्स अब इन गैसों का उपयोग प्लास्टिक या अन्य पेट्रोकेमिकल बनाने के लिए नहीं कर सकेंगे, ताकि घरेलू उपभोक्ताओं को गैस की किल्लत न हो।
-
सिर्फ OMCs को सप्लाई: उत्पादित सारी एलपीजी सीधे सरकारी तेल कंपनियों (IOC, BPCL, HPCL) को दी जाएगी।
राहत की उम्मीद: अमेरिका से आयात
हालाँकि कीमतें बढ़ी हैं, लेकिन सरकार सप्लाई बनाए रखने के लिए अन्य विकल्पों पर काम कर रही है। अमेरिका के गल्फ कोस्ट से एलपीजी का आयात शुरू हो चुका है, जो कुल जरूरत का 10% हिस्सा पूरा करेगा। साथ ही, भारतीय रिफाइनर्स के पास फिलहाल 25 दिनों का कच्चा तेल स्टॉक में सुरक्षित है।
सकार का दावा है कि इन कदमों से कीमतों की मार के बीच कम से कम गैस की किल्लत (Shortage) पैदा नहीं होने दी जाएगी।
